यूरो रिपोर्ट, कासगंज
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की कार्रवाई में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एटीएस की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव किलोनी का रहने वाला 20 वर्षीय शाहबाज सिद्दीकी पाकिस्तान के कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक सक्रिय सदस्य के सीधे संपर्क में था। वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर से लगातार बातचीत (चैट) कर रहा था
18 मई को सुन्नगढ़ी से हुई थी गिरफ्तारी
एटीएस की टीम ने बीते 18 मई को सुन्नगढ़ी स्थित शाहबाज के घर पर छापेमारी कर उसे हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई के दौरान एटीएस ने शाहबाज के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एसपी ओपी सिंह के अनुसार, युवक यूपी से बाहर रहकर शीशा लगाने का काम करता था और एटीएस ने उसे कई दिन पहले हिरासत में लिया था।
पुलवामा हमले को लेकर हुई थी बातचीत
जांच में जो सबसे सनसनीखेज बात सामने आई है, वह 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ी है। चैट के दौरान आतंकी मोहम्मद उमर ने शाहबाज से कहा था कि "आज तुम्हारे देश में ब्लैक डे होगा, लेकिन हमारे पाकिस्तान में खुशियां मनाई जा रही हैं।" इस तरह की देशविरोधी बातचीत से शाहबाज के पाकिस्तानी कनेक्शन की पुष्टि हो रही है।
मई में पोस्ट किए वीडियो से रडार पर आया आरोपी
सूत्रों के मुताबिक, शाहबाज ने मई महीने में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में पाकिस्तान समेत अन्य मुस्लिम देशों के झंडे लगे हुए थे और कुछ विवादित बातें भी शामिल थीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही वह एटीएस की रडार पर आ गया था। जब एटीएस ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से जांच की, तो देशविरोधी गतिविधियां और पाकिस्तानी आतंकियों से संपर्क ट्रैक हुआ, जिसके बाद उसे तुरंत दबोच लिया गया।
रिश्ता तय करने के बहाने पहुँची थी एटीएस टीम
शाहबाज को पकड़ने के लिए एटीएस ने बेहद चालाकी से जाल बुना था। शाहबाज के पिता आसिफ हुसैन ने बताया कि 18 मई को एटीएस टीम के कुछ सदस्य उनके घर रिश्ता तय करने के बहाने पहुंचे थे। इसी दौरान जैसे ही शाहबाज घर पहुंचा, टीम के बाकी सदस्य भी वहां आ गए और अचानक शाहबाज से मोबाइल के बारे में पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद टीम उसे पहले अलीगढ़ और फिर वहां से लखनऊ लेकर रवाना हो गई।
पिता का दावा- 'फंडिंग की बात गलत, खर्च के लिए लेता था पैसे'
आरोपी शाहबाज के पिता आसिफ हुसैन, जो हाथरस की एक आयुर्वेदिक कंपनी के तेल और दवाइयां बेचने का काम करते हैं, उन्होंने फंडिंग के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। पिता का कहना है कि उनका बेटा सोशल मीडिया पर चैट जरूर करता था, लेकिन आतंकी फंडिंग की बात सच नहीं है। शाहबाज केवल कक्षा चार तक पढ़ा है और पिछले पांच साल से पुणे में अपने मामा के घर रहकर शीशा लगाने का काम करता था। वह बीच-बीच में गांव आता-जाता रहता था और पैसे खत्म होने पर माता-पिता से खर्च के लिए रुपये मांगता था।
फिलहाल, एटीएस शाहबाज के दोनों मोबाइलों के फॉरेंसिक डेटा और उसकी पुरानी चैट्स को खंगाल रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।
रिपोर्टर: [पंकज पाठक पब्लिक आई न्यूज़,अवागढ़ ]


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